गधा और शेर की खाल - बच्चों की नैतिक कहानी
📚 कहानी की शुरुआत
एक घने जंगल के किनारे एक गधा रहता था, जो बहुत ही मेहनती था लेकिन अपने जीवन से संतुष्ट नहीं था। उसे लगता था कि कोई उसकी इज्जत नहीं करता, और सभी जानवर उसका मज़ाक उड़ाते हैं। वह हमेशा सोचता, "काश मैं भी कोई ताकतवर जानवर होता, जिससे सब डरते।"
एक दिन जंगल में घूमते हुए उसकी नजर शेर की एक पुरानी खाल पर पड़ी, जो किसी शिकारी ने वहीं छोड़ दी थी। गधे के मन में एक चालाकी भरा विचार आया – "अगर मैं इसे पहन लूं, तो सारे जानवर मुझे शेर समझेंगे और मुझसे डरेंगे!"
उसने फौरन वह खाल पहनी और अपने चेहरे को भी छुपा लिया। जैसे ही वह जंगल में निकला, सारे जानवर उसे देखकर डर गए। हिरन, खरगोश, बंदर और यहां तक कि सियार भी उसकी डरावनी चाल देखकर भाग खड़े हुए। गधा बहुत खुश हुआ और गर्व से सोचने लगा, “अब मैं जंगल का राजा बन गया हूँ।”
🐾 दिखावे की दुनिया
कुछ दिनों तक वह जंगल में घूमता रहा और सभी जानवर उससे डरते रहे। गधा अब खुद को बहुत समझदार और शक्तिशाली समझने लगा था। वह सोचता, "अब तो मुझे सब मानने लगे हैं, ये तो कमाल हो गया!" लेकिन वह भूल गया कि वह सिर्फ बाहर से शेर जैसा लग रहा था – अंदर से तो अब भी वही गधा था।
एक दिन वह बहुत उत्साहित हो गया और शेर की तरह दहाड़ने की कोशिश करने लगा, लेकिन उसके मुँह से गधे की रेंकने की आवाज़ निकली – "ढेंचू! ढेंचू!"
पास ही एक चालाक लोमड़ी ने आवाज़ सुनी और हँसते हुए बोली, “अरे! ये तो गधा है, जो शेर की खाल पहनकर सबको बेवकूफ बना रहा था!”
जल्द ही बात जंगल में फैल गई और सब जानवर वापस आ गए। उन्होंने गधे को शेर की खाल से बाहर निकाला और उसके झूठ का मज़ाक उड़ाया। गधा बहुत शर्मिंदा हुआ और समझ गया कि दिखावे से कुछ नहीं होता – सच्चाई और स्वभाव कभी नहीं छुपते।
🔔 शिक्षा:
दिखावा ज्यादा समय तक नहीं टिकता। जो हम अंदर से हैं, वही असली पहचान होती है। यह कहानी हमें सिखाती है कि आत्मसम्मान और सच्चाई सबसे बड़ा गुण है – नकल से कभी इज्जत नहीं मिलती।
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