🌟 ईमानदारी का इनाम - नैतिक कहानी
कहानी: एक सच्चा और ईमानदार बच्चा
रवि नाम का एक छोटा लड़का शहर की गलियों में अखबार बेचता था। उसका परिवार बहुत गरीब था — पिता बीमार और मां घरों में काम करती थी। रवि सुबह-सुबह उठकर अखबार बांटता और स्कूल भी जाता।
रवि पढ़ने में तेज़ था और उसका सपना था कि वह बड़ा होकर टीचर बने, ताकि दूसरे गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ा सके। वह बचपन से ही ईमानदार, सच्चा और समझदार था।
एक दिन दोपहर में रवि स्कूल से लौट रहा था, तभी रास्ते में उसे एक काले रंग का पर्स दिखाई दिया। पर्स भारी लग रहा था। उसने उसे उठाया और देखा कि उसमें बहुत सारा नकद पैसा, कुछ कार्ड्स और एक विजिटिंग कार्ड था।
रवि ने सोचा, "अगर मैं ये पैसा रख लूं तो मेरे घर की गरीबी कुछ दिनों के लिए दूर हो जाएगी। लेकिन अगर पर्स किसी जरूरतमंद का है, तो उसका क्या होगा?"
उसने तुरंत निर्णय लिया और कार्ड पर लिखे पते पर गया। वह पता एक बड़ी कोठी का था। रवि ने दरवाज़ा खटखटाया। एक वृद्ध व्यक्ति ने दरवाज़ा खोला, वह बहुत परेशान दिख रहे थे। रवि ने उनसे पूछा, “क्या आपका पर्स खो गया है?”
वृद्ध व्यक्ति ने हैरानी से देखा और कहा, “हाँ बेटा! मेरा बहुत ज़रूरी सामान था उसमें।” रवि ने वह पर्स उन्हें सौंप दिया। उन्होंने खोलकर देखा – सब कुछ सुरक्षित था।
वृद्ध व्यापारी की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा, “आजकल ऐसे ईमानदार बच्चे बहुत कम मिलते हैं। तुम्हारे जैसे बच्चे ही देश का भविष्य हैं।”
उन्होंने रवि से उसका नाम, स्कूल और घर का पता पूछा। कुछ ही दिनों में रवि को एक स्कूल से स्कॉलरशिप मिली, उसके पिता का इलाज शुरू हुआ और उसकी मां को एक स्थायी काम मिल गया।
रवि ने फिर भी अपनी सादगी और मेहनत नहीं छोड़ी। वह अब भी बच्चों को पढ़ाता था, और लोगों को ईमानदारी की मिसाल देता था।
🌿 सीख:
ईमानदारी और सच्चाई केवल अच्छे गुण नहीं हैं, बल्कि जीवन में बदलाव लाने वाली ताकत हैं।
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